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1.
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जिन कृषकों का खेत खाली हो तथा उसमें पर्याप्त नमी भी हो, उसे शीघ्र तैयार कर शरदकालीन
गन्ना की बुवाई करें। खेत की तैयारी के समय यदि उपलब्ध हो तो उसमें जैविक खाद- कम्पोस्ट,
गोबर की खाद या प्रेसमड सड़ी हुई का प्रयोग अवश्य करें।
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2.
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शरदकालीन बुवाई में प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पकने वाली प्रजातियां को0शा0 8436,
88230, 96268, को0से0 95436, 98231, 00231 व को0से0 01235 की बुवाई करें ताकि चीनी
मिलों की पेराई शीघ्र प्रारम्भ करना सम्भव हो सके।
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3.
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.सामान्य प्रजातियों में को0शा0 8432, को0शा0 96275, को0शा0 97261, यू0पी0 0097, को0शा0
97264 की बुवाई को प्राथमिकता है।
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4.
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शरदकालीन गन्ने की बुवाई में पंक्ति से पंक्ति की दूरी 90 सेमी0 एवं कूड़ों की गहराई
10 सेमी0 ही रखें। गन्ने की दो पंक्तियों के मध्य उपलब्ध संसाधनों के अनुसार आलू (एक
पंक्तिद्ध, मटर फली (दो पंक्तिद्ध लाही (दो पंक्तिद्ध, सौंफ, धनिया, मसूर, शरदकालीन
सब्जियां अन्त: फसल के रूप में बोकर दोहरालाभ कमाएं। आलू, लहसुन व मटर फली अन्त: खेती
करने से गन्ने की उपज मे 8-10 प्रतिशत की वृद्धि होती है।
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5.
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जिन क्षेत्रों में वर्षाकाल में पर्याप्त वर्षा न हुई हो वहां इस समय सिंचाई करने उत्पादकता
में वृद्धि होती है।
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6.
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गन्ना बुवाई के समय संतुलित उर्वरक का प्रयोग करना आवश्यक है। यदि मृदा परीक्षण कराया
गया है तो संस्तुति के अनुरूप उर्वरक प्रयोग करें। यदि परीक्षण नहीं है तो बुवाई के
समय कूड़ों में 115 कि0ग्रा0 यूरिया+132 कि0ग्रा0 म्यूरेट आफ पोटाश प्रति हेक्टेयर
का प्रयोग करें। कुछ क्षेत्रों में जस्ता की कमी है ऐसे क्षेत्रों में 25 किग0ग्रा0
जिंक सल्फोट डालें।
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